जलवायु परिवर्तन के दौर में हरेला पर्व का बढ़ा महत्व, बोले डॉ. ललित तिवारी
उत्तराखंड का पारंपरिक लोकपर्व हरेला आज केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश भी बन चुका है। नैनीताल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. ललित तिवारी ने हरेला के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के बीच पेड़-पौधों का संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है। हरेला पर्व लोगों को प्रकृति से जुड़ने और पौधारोपण के लिए प्रेरित करता है।
डॉ. तिवारी ने बताया कि पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए हरेला केवल परंपरा नहीं बल्कि पर्यावरण बचाने का सामाजिक अभियान भी है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में वर्ष में तीन बार हरेला मनाया जाता है, लेकिन श्रावण मास का हरेला सबसे अधिक लोकप्रिय और सामाजिक महत्व वाला माना जाता है। इस दौरान परिवार और समाज एक साथ मिलकर हरियाली का उत्सव मनाते हैं।
उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की, ताकि भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण मिल सके।