ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर उत्तराखंड, तपोवन में जियोथर्मल परियोजना से बढ़ी उम्मीदें
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में लागू की गई जियोथर्मल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत अब प्राकृतिक गर्म जल स्रोतों से ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं को विकसित किया जाएगा।
पहले चरण में चमोली जिले के तपोवन में 10 मेगावाट की पायलट परियोजना के लिए सर्वेक्षण और तकनीकी अन्वेषण शुरू किया गया है। यह परियोजना भविष्य में बड़े स्तर पर जियोथर्मल ऊर्जा उत्पादन का आधार बन सकती है।
जियोथर्मल ऊर्जा पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ लंबे समय तक उपलब्ध रहने वाला ऊर्जा स्रोत है। इससे बिजली उत्पादन के अलावा उद्योगों, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को भी फायदा मिलने की संभावना है।
सरकार का मानना है कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग कर उत्तराखंड को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाया जा सकता है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।
बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच के कारण उत्तराखंड नई तकनीकों को तेजी से अपनाने वाला राज्य बन रहा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आने वाले समय में राज्य की बड़ी उपलब्धियों में शामिल होगी।