विलुप्ति की कगार से वापसी की ओर दून बासमती, किसानों को मिल रही नई उम्मीद
देहरादून: कभी देहरादून की शान रही दून बासमती समय के साथ अपनी पहचान खोती चली गई। खेती का रकबा लगातार घटता गया और यह फसल विलुप्ति के करीब पहुंच गई। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और इसकी वापसी की उम्मीद मजबूत होती दिख रही है।
जिला प्रशासन के प्रयासों से इस वर्ष 160 किसान 75 हेक्टेयर क्षेत्र में दून बासमती की खेती कर रहे हैं। पिछले साल के सफल ट्रायल ने किसानों का विश्वास बढ़ाया और अधिक किसानों ने इस अभियान में हिस्सा लिया।
मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह के अनुसार, एक समय दून बासमती की खेती 550 हेक्टेयर में होती थी, जो घटकर 150 से 200 हेक्टेयर रह गई थी। अब प्रशासन इसे फिर से बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है।
किसानों को बेहतर बीज, उचित मूल्य और बाजार उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। विकासनगर में सीड बैंक और टेस्टिंग सुविधा शुरू होने से भविष्य में किसानों को और अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
यदि यह अभियान लगातार सफल रहता है तो दून बासमती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगी बल्कि देहरादून की ऐतिहासिक पहचान को भी नई ऊंचाई देगी।