राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में चमकी ‘ढोली’, गढ़वाली भाषा की फिल्मों के लिए खुला नया रास्ता
देहरादून: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में गढ़वाली फिल्म ‘ढोली’ को सम्मान मिलने से उत्तराखंड की क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति को देशभर में नई पहचान मिली है। यह उपलब्धि गढ़वाली फिल्म उद्योग के लिए किसी ऐतिहासिक उपलब्धि से कम नहीं मानी जा रही।
निर्देशक दिनेश पी. भोंसले द्वारा निर्देशित यह फिल्म साहित्यकार डॉ. नंदकिशोर हटवाल की प्रसिद्ध कहानी ‘जमनदास ढोली’ पर आधारित है। फिल्म को उसकी मजबूत कहानी, संवेदनशील प्रस्तुति और सांस्कृतिक गहराई के लिए सराहा गया है।
‘ढोली’ में लोक कलाकारों के संघर्ष, उनकी परंपराओं और सामाजिक बदलावों को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया है। फिल्म दर्शाती है कि किस तरह लोककला आज भी उत्तराखंड की पहचान बनी हुई है।
उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद का कहना है कि इस सम्मान से स्थानीय कलाकारों को नई ऊर्जा मिलेगी और प्रदेश में क्षेत्रीय फिल्मों का निर्माण तेजी से बढ़ेगा। राज्य सरकार की फिल्म नीति भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि आने वाले समय में उत्तराखंड को देश के प्रमुख फिल्म निर्माण केंद्रों में शामिल करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।