उत्तराखंड के मदरसों में लागू होगी नई शिक्षा व्यवस्था, एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर रहेगा जोर
देहरादून: उत्तराखंड में आज से मदरसा शिक्षा व्यवस्था नए स्वरूप में प्रवेश कर गई है। राज्य सरकार ने मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त करते हुए उसकी सभी जिम्मेदारियां राज्य अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण को सौंप दी हैं। इस फैसले के साथ मदरसों के संचालन और शैक्षणिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे।
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मदरसों में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देना है। सरकार चाहती है कि धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और अन्य विषयों की भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, जिससे उनका भविष्य बेहतर बन सके।
प्रदेश के 452 पंजीकृत मदरसे अब नए प्रशासनिक ढांचे के तहत संचालित होंगे। इन संस्थानों में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में काम शुरू किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रणाली से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव को पूरी तरह सफल बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति और आधारभूत सुविधाओं का विकास आवश्यक होगा। इसके साथ ही अपंजीकृत मदरसों के लिए स्पष्ट नीति भी तैयार करनी होगी।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बावजूद छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। प्रशासन का दावा है कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएंगी।