थराली की घटना ने बढ़ाई चिंता, गर्भवती महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग पर उठे कई सवाल
थराली में गर्भवती महिला की मौत की घटना ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिलने और विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव के कारण महिला की जान चली गई। फिलहाल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
मृतका सरिता देवी को प्रसव पीड़ा के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली में भर्ती कराया गया था। परिवार का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद महिला की जांच में कई घंटे की देरी हुई। बाद में चिकित्सकों ने उसे कर्णप्रयाग अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
आरोप है कि रेफर किए जाने के दौरान 108 एम्बुलेंस में आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की भी कमी थी। रास्ते में महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और नारायणबगड़ के पास उसने अंतिम सांस ली। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
ग्राम प्रधान के अनुसार, मृतका के दो छोटे बच्चे हैं, जिनके सिर से मां का साया उठ गया है। गांव के लोगों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। परिजनों ने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।