देशभर से पहुंचे शिवभक्त, टनकपुर से शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा; श्रद्धा, संस्कृति और पर्यटन का बना संगम…
चम्पावत : कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। शनिवार को जब 51 सदस्यीय पहला जत्था टनकपुर पहुंचा तो देवभूमि उत्तराखंड ने अपने पारंपरिक आतिथ्य से श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया।
छोलिया नृत्य, पुष्पवर्षा, फूल-मालाएं और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी।
पहले दल में देश के 13 राज्यों के श्रद्धालु शामिल हैं। राजस्थान के 68 वर्षीय पुरुषोत्तम खंडेलवाल सबसे वरिष्ठ यात्री हैं, जबकि गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्णा सबसे युवा श्रद्धालु हैं। तमिलनाडु के डॉ. अरुण कुमार पूरे दल के साथ चिकित्सक के रूप में यात्रा कर रहे हैं।
रविवार सुबह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पहले जत्थे को रवाना करेंगे। प्रशासन का कहना है कि यात्रा के प्रत्येक चरण में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
लगातार दूसरे वर्ष टनकपुर मार्ग से संचालित हो रही कैलाश मानसरोवर यात्रा सीमांत जनपद चम्पावत के लिए नई संभावनाएं लेकर आई है। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से होटल उद्योग, परिवहन, स्थानीय व्यापार और स्वरोजगार को उल्लेखनीय बढ़ावा मिल रहा है। यही कारण है कि इस यात्रा को आस्था के साथ-साथ उत्तराखंड के आर्थिक विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।