विश्व पर्यावरण दिवस: सेवानिवृत्त जवानों की नई पहचान—प्रकृति के प्रहरी
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सभी साथियों से एक महत्वपूर्ण अपील है—आइए, हम सब मिलकर पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी बनाएं। आज दुनिया ग्लोबल वार्मिंग के गंभीर खतरे से जूझ रही है और इसका सबसे प्रभावी समाधान है अधिक से अधिक वृक्षारोपण।
हर व्यक्ति को साल में कम से कम पांच बार पौधे लगाने चाहिए। अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह, माता-पिता के विशेष दिनों या बच्चों के जन्मदिन जैसे अवसरों को पर्यावरण के नाम समर्पित करें। यह छोटा कदम भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकता है।
ग्वालियर के उदयपुर मुरार स्थित नीम-शीशम पर्यटन स्थल इसका एक प्रेरक उदाहरण है, जहां लगभग 20 हजार पेड़ों का हराभरा जंगल विकसित किया गया है। यहां आने वाले लोग प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताते हैं और देशी चूल्हे पर बने पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैं।
लेखक ने अपने जीवन के 35 वर्ष Border Security Force और Special Protection Group जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में बिताए हैं। अब वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी नई जिम्मेदारी मानते हैं और समाज को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
सेवानिवृत्त साथियों से विशेष अनुरोध है कि वे अपने गांव लौटकर प्रकृति की सेवा करें और वृक्षारोपण के माध्यम से पर्यावरण बचाने की इस मुहिम का हिस्सा बनें।